'अरे मां देखो फिर रेप हो गया', रिंकी ने अखबार से पढ़कर मां को बताया ।
'अरे बेवकूफ लड़की, कुछ भी बोलती रहती है तेरे पापा सुन लेंगे । बोलने से पहले सोचती भी नहीं '।
'हां सुन लिया मैंने,' पापा ने गुस्से से कहा ।
'अरे पापा न्यूज़पेपर में लिखा है', रिंकी ने कहा ।
'कुछ भी लिखते हैं पेपर वाले और वह भी बड़ा चढ़ा कर और यह सब उन लड़कियों के साथ होता है जो बड़ों का कहना नहीं मानती '।
'पापा यह तो..'
'क्या यह तो... अजी खुद लड़कों के साथ बेशर्मी से घूमती हैं ऐसी लड़कियां..'
'लेकिन पापा... रिंकी ने फिर कुछ कहना चाहा पर पापा ने फिर टोक दिया '।
'तुम जानती भी हो कुछ? इन लड़कियों का चरित्र?' पापा को बहुत गुस्सा आ रहा था ।
लेकिन पापा....
'चुप हो जा .....बड़ों की बात काटने लगी हो?
और वही लड़कियां हैं जो छोटे-छोटे कपड़े पहन कर .......खैर छोड़ो...
पर पापा...
'क्या पर पापा, लड़की जात को शर्म लिहाज होनी चाहिए।'
'पापा देखो तो सही न्यूज़ पेपर में क्या लिखा है'.. रिंकी ने जल्दी से कह ही दिया।
'अरे जरा सा पढ़ लिख मां-बाप को बुद्धू समझने लगती हैं। जानता हूं ऐसे परिवारों को जहां लड़कियों को ज्यादा ही छूट दी जाती है'।
'अब मेरी बात तो सुनिए प्लीज'
'नहीं सुननी कोई बात । और ऐसी गंदी ख़बरें पढ़ना बंद करो, दिमाग खराब हो जाता है, अखबार तुम्हारे करंट अफेयर्स के लिए लगाया गया है ना कि ऐसी बकवास पढ़ने के लिए । पढ़ाई पर ध्यान दो समझी! हमारे यहां ऐसी बातें ना हुई है ना होगी. बस जाओ यहां से' ।
इतना सुनकर भी रिंकी वहीं पर खड़ी रही और पापा के सामने न्यूजपेपर रख कर बोली।
'पापा एक 6 साल की बच्ची के साथ ऐसा हुआ है।'
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